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विस्तृत उत्तर
जब जीवात्मा को यमराज के दरबार में लाया जाता है और यदि वह अपने पापों को नकारने का प्रयास करती है, तो श्रवण और श्रवणी देव यमराज के समक्ष प्रत्यक्ष गवाह के रूप में प्रस्तुत होते हैं। वे जीवात्मा के प्रत्येक कृत्य का प्रमाण देते हैं, क्योंकि उन्होंने मनुष्य के गुप्त से गुप्त कर्मों को उसी क्षण देखा और सुना होता है। संसार में जो कोई जैसा भी शुभ या अशुभ बोलता है, उसे वे ब्रह्मा के कानों तक और भगवान चित्रगुप्त की पंजिका तक पहुंचाते हैं।
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