विस्तृत उत्तर
यमराज पापी और पुण्यात्मा के साथ अलग व्यवहार इसलिए करते हैं क्योंकि उनका दर्शन और उनका निर्णय जीवात्मा के कर्मों के आधार पर होता है। पाप कर्मों में लिप्त जीवात्माओं को यमराज अत्यंत भयंकर, कृष्ण वर्ण वाले, लाल नेत्रों वाले और मृत्यु-पाश तथा काल-दण्ड धारण किए हुए दिखाई देते हैं। इसके विपरीत, जिन पुण्यात्माओं ने सत्य, धर्म, दान और अहिंसा का पालन किया है, उन्हें यमराज सौम्य, शांत और देव रूप में दिखाई देते हैं। अत्यंत पुण्यात्मा के यमलोक पहुँचने पर धर्मराज स्वयं अपने आसन से उठकर उसका स्वागत करते हैं। यह कर्म-सिद्धांत का दर्पण है, जहाँ जीवात्मा अपने ही कर्मों की छाया यमराज के स्वरूप में देखती है।
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