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विस्तृत उत्तर
पापी जीवों के लिए यममार्ग की यात्रा के दौरान पिण्डज शरीर यातना देह में परिवर्तित हो जाता है। यह शरीर वायु-प्रधान बताया गया है। इसका उद्देश्य यममार्ग और नरक के दारुण कष्टों को सहना है। यह शरीर अग्नि में जलने, कटने या फटने पर भी नष्ट नहीं होता, परंतु असीम पीड़ा अनुभव करता है। यममार्ग में इसी देह को खाया, फाड़ा और भेदा जाता है, और जीव अत्यंत दुख भोगता है।
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