विस्तृत उत्तर
यतिनाथ अवतार की कथा शिव पुराण के शतरुद्र संहिता में वर्णित है। यह कथा अतिथि-सत्कार और शिव-भक्ति की परम महिमा का वर्णन करती है।
कथा — अर्बुदाचल (आबू) पर्वत के समीप 'आहुक' नामक एक भील रहता था जिसकी पत्नी का नाम 'आहुका' था। वे दोनों परम शिवभक्त थे। एक दिन आहुक आहार की खोज में जंगल में बहुत दूर चला गया। उसी संध्याकाल में भगवान शिव ने आहुक-आहुका की परीक्षा लेने के लिए संन्यासी (यतिनाथ) का वेश धारण कर उनके घर प्रवेश किया।
परीक्षा — रात्रि में यति-अतिथि की सेवा का दायित्व आहुका पर था। जंगली जानवरों के भय में भी आहुका ने घर के बाहर सोकर यति की रक्षा की और प्रातःकाल जानवरों के आक्रमण में उसके प्राण चले गए। आहुक जब लौटा तो पत्नी को मृत देखकर दुखी हुआ परंतु अतिथि-धर्म से विचलित नहीं हुआ।
वरदान — भगवान शिव प्रसन्न होकर लिंगरूप में प्रकट हुए। उस लिंग को 'अचलेश' नाम दिया गया। अगले जन्म में आहुक महाराज नल बने और आहुका दमयन्ती। शिव ने हंसरूप में प्रकट होकर नल-दमयन्ती का विवाह कराया।





