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अद्वैत वेदांत प्रश्नोत्तरी — 5 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित अद्वैत वेदांत विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 5 प्रश्न

वेदांत दर्शन

अद्वैत वेदांत में विष्णु का क्या स्थान है?

अद्वैत (शंकराचार्य): एक ही सत्ता सत्य = निर्गुण-निराकार परब्रह्म। माया से युक्त होने पर सगुण विष्णु/शिव। जीव और ब्रह्म तत्वतः एक। दृश्यमान जगत = माया-जनित मिथ्या। सगुण विष्णु भक्ति → चित्त शुद्धि → निर्गुण ब्रह्म प्राप्ति → ब्रह्म में लीन।

अद्वैत वेदांतशंकराचार्यनिर्गुण ब्रह्म
भक्ति एवं आध्यात्म

माया क्या है शंकराचार्य के अनुसार?

शंकराचार्य के अनुसार माया वह अनिर्वचनीय शक्ति है जो ब्रह्म के एकमात्र सत्य को आच्छादित करके जगत की मिथ्या प्रतीति कराती है। ज्ञान से ही माया का पर्दा हटता है।

मायाशंकराचार्यअद्वैत वेदांत
ज्ञान एवं दर्शन

पाँच मठ और शंकराचार्य परंपरा

आदि शंकराचार्य ने चार दिशाओं में चार मठ स्थापित किए — दक्षिण में श्रृंगेरी, पूर्व में गोवर्धन (पुरी), पश्चिम में द्वारका और उत्तर में ज्योतिर्मठ। इन चार पीठों के प्रमुख को जगद्गुरु शंकराचार्य कहते हैं।

शंकराचार्यचार मठअद्वैत वेदांत
ज्ञान एवं दर्शन

श्रृंगेरी मठ का इतिहास

श्रृंगेरी शारदा पीठ की स्थापना आदि शंकराचार्य ने 8वीं शताब्दी में कर्नाटक के चिकमंगलुर में की थी। यह उनके चार मठों में दक्षिण का मठ है। पहले पीठाधीश सुरेश्वराचार्य (मंडन मिश्र) थे। इसका महावाक्य है 'तत्त्वमसि'।

श्रृंगेरी मठआदि शंकराचार्यशारदा पीठ
दर्शन

अद्वैत वेदांत के अनुसार आत्मा और ब्रह्म एक कैसे?

शंकराचार्य: 'ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या, जीवो ब्रह्मैव नापरः।' आत्मा ब्रह्म ही है — अज्ञान (माया) के कारण भेद दिखता है। घड़े का आकाश = महाआकाश, लहर = समुद्र। चारों महावाक्य यही कहते हैं। अज्ञान हटना ही मोक्ष है।

अद्वैत वेदांतआत्मा ब्रह्मशंकराचार्य

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।