विस्तृत उत्तर
श्रृंगेरी शारदा पीठ भारत के कर्नाटक राज्य के चिकमंगलुर जिले में तुंगा नदी के तट पर स्थित है। इसकी स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य ने लगभग 8वीं शताब्दी ईस्वी (725 ई. के आसपास) में की थी। यह आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार प्रमुख मठों में सर्वप्रथम और दक्षिण दिशा का मठ है — दक्षिणाम्नाय पीठ। शंकराचार्य ने भारत में फैल रहे बौद्ध प्रभाव और विधर्मी मतों से सनातन वैदिक परंपरा को बचाने के लिए इस मठ की स्थापना की। उन्होंने अपने प्रिय शिष्य सुरेश्वराचार्य (जो पहले मंडन मिश्र के नाम से प्रसिद्ध थे) को इस मठ का प्रथम पीठाधीश नियुक्त किया। श्रृंगेरी पीठ का महावाक्य है 'तत्त्वमसि' और इसके अंतर्गत यजुर्वेद को रखा गया है। इस मठ के संन्यासियों के नाम के बाद 'सरस्वती', 'भारती' और 'पुरी' उपाधि लगाई जाती है। 14वीं शताब्दी में इस मठ के 12वें आचार्य विद्यारण्य स्वामी के दिव्य मार्गदर्शन में विजयनगर साम्राज्य की नींव रखी गई थी। हैदर अली, टीपू सुल्तान, पेशवा और मैसूर के महाराजा जैसे अनेक शासकों ने इस मठ को संरक्षण और सम्मान दिया। वर्तमान में यह मठ जगद्गुरु शंकराचार्य महासंस्थानम के नाम से जाना जाता है और यहाँ वैदिक विद्या की अविरल परंपरा आज भी जीवित है।





