विस्तृत उत्तर
स्मार्त संप्रदाय हिंदू धर्म की सबसे उदार और समन्वयवादी परंपरा है। 'स्मार्त' का अर्थ है — स्मृतियों पर आधारित। जो स्मृतियों में दी गई विधि का पालन करते हैं, वे स्मार्त कहलाते हैं।
पंचदेवोपासना अर्थात् पाँच देवताओं की एकसाथ उपासना — यह स्मार्त परंपरा की मुख्य विशेषता है। इसे 'पंचायतन पूजा' भी कहते हैं।
पाँच देवता हैं — 1. शिव, 2. विष्णु, 3. शक्ति (देवी), 4. गणेश, 5. सूर्य।
इस व्यवस्था को आदि शंकराचार्य (8वीं शताब्दी) ने व्यवस्थित रूप दिया। उनका दर्शन अद्वैत वेदांत है — 'एकं सत् विप्रा बहुधा वदंति' — सत्य एक है, विद्वान उसे अनेक नामों से जानते हैं। शिव, विष्णु, शक्ति, गणेश, सूर्य — सभी उसी एक परमब्रह्म के भिन्न रूप हैं।
पंचायतन पूजा की विधि — एक छोटी वेदी (पंचायतन) पर पाँचों देवताओं की मूर्तियाँ या प्रतीक-शिलाएं रखी जाती हैं। व्यक्ति अपने इष्टदेव को केंद्र में और शेष चार को चारों कोनों में रखता है। प्रतिदिन सभी की पूजा होती है।
स्मार्त परंपरा के संस्कार — शैव और वैष्णव दोनों परंपराओं के त्यौहार मनाते हैं। इनके लिए कोई एकल तिलक-विधि नहीं — परिवार की परंपरा के अनुसार।
पंचदेवोपासना का संदेश यह है — हिंदू धर्म में कोई एक देवता 'सही' और अन्य 'गलत' नहीं — सभी मार्ग एक ही परमसत्ता तक ले जाते हैं।





