विस्तृत उत्तर
शैव और वैष्णव — हिंदू धर्म के दो प्रमुख संप्रदाय हैं जो सहस्राब्दियों से साथ-साथ चले आ रहे हैं। दोनों एक ही सनातन परंपरा की शाखाएं हैं किंतु उनके आराध्य, पूजा-पद्धति और दार्शनिक दृष्टि में अंतर है।
आराध्य देव — शैव भगवान शिव को परमेश्वर मानते हैं। वैष्णव भगवान विष्णु (और उनके अवतार राम-कृष्ण) को परमेश्वर मानते हैं।
तिलक — शैव त्रिपुण्ड (भस्म से तीन आड़ी रेखाएं) लगाते हैं। वैष्णव ऊर्ध्वपुंड्र (चंदन से दो ऊर्ध्व रेखाएं और बीच में तुलसी से लाल बिंदी) लगाते हैं।
पूजा-सामग्री — शिव को बेलपत्र, भाँग, धतूरा, जल विशेष प्रिय हैं। विष्णु को तुलसी, पंचामृत, केसर प्रिय हैं — हल्दी शिव को नहीं चढ़ाते।
ग्रंथ — शैवों के प्रमुख ग्रंथ शिव पुराण, स्कंद पुराण हैं। वैष्णवों के प्रमुख ग्रंथ भागवत पुराण, विष्णु पुराण हैं।
दार्शनिक दृष्टि — कश्मीरी शैव दर्शन में शिव ही एकमात्र सत्य हैं (शैवाद्वैत)। वैष्णव परंपरा में विशिष्टाद्वैत, द्वैत जैसे अनेक दर्शन हैं।
समाधि/अंत्येष्टि — शैव साधुओं को समाधि दी जाती है (दाह-संस्कार नहीं)। वैष्णव साधुओं को भी प्रायः समाधि दी जाती है।
महत्वपूर्ण बात — दोनों संप्रदाय एक ही परमसत्ता के दो रूपों की उपासना करते हैं। स्मार्त दृष्टि में शिव और विष्णु एक ही हैं — 'शिवस्य हृदयं विष्णुः, विष्णोश्च हृदयं शिवः।'





