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विस्तृत उत्तर
इस कथा के अनुसार सृष्टि की शुरुआत भगवान विष्णु के सृजन-संकल्प से हुई। महाप्रलय के मौन में पहले एक सूक्ष्म स्पंदन जागा, फिर उसी स्पंदन से आदिनाद यानी प्रथम दिव्य ध्वनि प्रकट हुई। आदिनाद ने कारण-जल में ऊर्जा जगाई और विष्णु की प्रथम श्वास ने उस ऊर्जा को गति दी। इसके बाद कालचक्र चला, पंचभूत जागे, दिशाएँ बनीं और सृष्टि विस्तार लेने लगी।
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