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राधा कृष्ण युगल पूजा कैसे करें?

राधाजी को श्रीकृष्ण की बाईं ओर स्थापित करें। पंचामृत स्नान, मिलते-जुलते वस्त्र, गुलाब-तुलसी, माखन-मिश्री-पेड़े का भोग। 'ॐ राधा-कृष्णाभ्यां नमः' या 'राधे कृष्णा' जप करें।

संक्षिप्त उत्तर

राधाजी को श्रीकृष्ण की बाईं ओर स्थापित करें। पंचामृत स्नान, मिलते-जुलते वस्त्र, गुलाब-तुलसी, माखन-मिश्री-पेड़े का भोग। 'ॐ राधा-कृष्णाभ्यां नमः' या 'राधे कृष्णा' जप करें। एकादशी और राधाष्टमी पर विशेष पूजा करें।

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विस्तृत उत्तर

राधा कृष्ण की युगल पूजा वैष्णव भक्ति की सर्वोच्च साधना मानी जाती है। इसमें राधाजी और श्रीकृष्ण को एक ही पीठ पर विराजित मानकर उनकी पूजा की जाती है। निम्बार्क सम्प्रदाय विशेष रूप से राधा-कृष्ण युगल उपासना के लिए प्रसिद्ध है।

युगल पूजा की विधि:

शुभ समय — राधाष्टमी, जन्माष्टमी, एकादशी, पूर्णिमा और शुक्रवार युगल पूजा के लिए विशेष शुभ माने जाते हैं। नित्य पूजा किसी भी दिन की जा सकती है।

स्थापना — राधाजी और श्रीकृष्ण की प्रतिमाएँ अथवा चित्र एक साथ स्थापित करें। राधाजी को श्रीकृष्ण के बाईं ओर स्थापित करें। उनके नीचे लाल या पीला वस्त्र बिछाएँ।

स्नान — दोनों विग्रहों को पंचामृत से अभिषेक कराएँ — दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल।

श्रृंगार — दोनों को युगल के रूप में सजाएँ — मिलते-जुलते वस्त्र, गहने और माला। राधाजी को गुलाबी या लाल और श्रीकृष्ण को पीले वस्त्र पहनाने की परंपरा प्रचलित है।

गंध और पुष्प — दोनों को केसर-मिश्रित चंदन अर्पित करें। गुलाब, कमल और तुलसी विशेष प्रिय हैं। 'राधे राधे' और 'हरे कृष्ण' — दोनों का मंत्र जपते हुए फूल चढ़ाएँ।

भोग — माखन-मिश्री, पेड़े, मिठाई, फल और तुलसी का भोग अर्पित करें। युगल को एक साथ भोग लगाएँ।

धूप-दीप — धूप जलाएँ और घी का दीपक प्रज्वलित करें। आरती में 'श्री राधा-कृष्ण आरती' करें।

मंत्र — 'ॐ राधा-कृष्णाभ्यां नमः' या 'राधे कृष्णा राधे कृष्णा' का जप करें। निम्बार्क सम्प्रदाय में 'राधे कृष्ण' — यही महामंत्र माना गया है।

झूलन और उत्सव — श्रावण मास में झूलन लीला का विशेष आयोजन करें। दोनों को झूले में बिठाकर कीर्तन गाएँ।

युगल पूजा में यह भाव रखा जाता है कि राधाजी और कृष्ण एक ही दिव्य तत्व के दो रूप हैं — राधा प्रेम-शक्ति हैं और कृष्ण उस शक्ति के स्वामी।

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