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विस्तृत उत्तर
इस कथा में ध्वनि को सृष्टि की आरंभिक शक्ति बताया गया है। आदिनाद ने महाप्रलय के मौन को तोड़ा और कारण-जल में पहला कंपन उत्पन्न किया। यही कंपन आगे आकाश, तन्मात्राओं और पंचभूतों के जागरण का कारण बना। इसलिए हिंदू चिंतन में ध्वनि को केवल श्रवण की वस्तु नहीं, बल्कि सृष्टि को गति देने वाली दिव्य शक्ति माना गया है।
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