विस्तृत उत्तर
शाक्त संप्रदाय हिंदू धर्म के प्रमुख चार संप्रदायों में से एक है। इसमें आदिशक्ति (दुर्गा, काली, ललिता, भुवनेश्वरी आदि) को ब्रह्मांड की परम शक्ति और सर्वोच्च देवता माना जाता है। देवी माँ के शिव, विष्णु आदि भी उपासक माने जाते हैं।
शाक्त उपासना की विशेषताएं —
पहली — देवीसप्तशती (दुर्गासप्तशती) का पाठ। यह 700 श्लोकों का ग्रंथ मार्कंडेय पुराण का अंग है और शाक्त उपासना का सर्वाधिक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। नवरात्रि में इसका नित्य पाठ अनिवार्य माना जाता है।
दूसरी — षोडशोपचार पूजन। देवी को स्नान, वस्त्र, अलंकार, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य सहित पूर्ण पूजा होती है। लाल पुष्प, कुमकुम, सिंदूर देवी को विशेष प्रिय माने जाते हैं।
तीसरी — नवरात्रि की विशेष उपासना। वर्ष में दो बार (चैत्र और शारदीय) नौ दिन की नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की क्रमशः उपासना होती है।
चौथी — श्रीयंत्र और तांत्रिक उपासना। शाक्त परंपरा में श्रीयंत्र (श्रीचक्र) देवी का प्रतीक है। तांत्रिक शाक्त परंपरा में यंत्र, मंत्र और तंत्र का त्रिकोणात्मक उपयोग होता है।
पाँचवीं — देवी-भागवत पुराण। यह शाक्तों का प्रमुख पुराण है जिसमें देवी की महिमा और उपासना विधि विस्तार से वर्णित है।
शाक्त तिलक त्रिकोणात्मक होता है और वे कुमकुम-सिंदूर का उपयोग करते हैं।





