विस्तृत उत्तर
अर्गला स्तोत्र = दुर्गा सप्तशती का दूसरा अंग (कवच→अर्गला→कीलक→सप्तशती)।
अर्थ: 'अर्गला' = सिटकनी/ताला खोलना। देवी शक्ति का ताला खोलने वाला स्तोत्र।
लाभ: धन-धान्य प्राप्ति ('रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि'), यश, सौंदर्य, शत्रु नाश, विजय, समृद्धि। सप्तशती शक्ति सक्रिय।
विधि: सप्तशती पाठ क्रम में दूसरा (कवच बाद)। नवरात्रि/शुक्रवार। ~5-7 min।





