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उज्जैन प्रश्नोत्तरी — 9 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उज्जैन विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 9 प्रश्न

शिव रूप महिमा

शिव का महाकाल रूप क्या दर्शाता है

महाकाल = काल के भी काल। शिव समय और मृत्यु के परम अधिपति हैं। उज्जैन का दक्षिणमुखी महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग इसी रूप का जाग्रत प्रतीक है। महाकाल की शरण में भक्त को काल का भय नहीं।

महाकालकाल के कालउज्जैन
शिव रूप

काल भैरव की पूजा में मदिरा का अर्पण क्यों किया जाता है?

काल भैरव = तामसिक देवता, वाम मार्गी तांत्रिक परंपरा। ब्रह्मा वध कथा (शिव पुराण) — उग्र स्वरूप को तामसिक भोग। उज्जैन मंदिर: मूर्ति मदिरा ग्रहण करती है — ~2000 बोतल/दिन, अनसुलझा रहस्य। प्रसाद नहीं लिया जाता। सामान्य शिव पूजा में मदिरा सर्वथा वर्जित।

काल भैरवमदिराउज्जैन
शिव मंदिर

उज्जैन महाकालेश्वर की भस्म आरती का रहस्य क्या है?

12 ज्योतिर्लिंगों में केवल महाकालेश्वर में भस्म आरती। सुबह 4 बजे, ~2 घंटे। पौराणिक: दूषण राक्षस भस्म → शिव श्रृंगार। प्राचीन: श्मशान भस्म; वर्तमान: गाय गोबर + 6 वृक्ष लकड़ी। अघोर मंत्र से भस्म रमाना। निराकार दर्शन = मोक्ष। 6 दैनिक आरतियां।

महाकालेश्वरभस्म आरतीउज्जैन
ज्योतिर्लिंग

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन में ही क्यों है?

उज्जैन में दूषण राक्षस के अत्याचार से त्रस्त शिवभक्तों की पुकार पर शिव भूमि फाड़कर प्रकट हुए और दूषण का वध किया। भक्तों के अनुरोध पर वे महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग रूप में वहीं विराजित हो गए। काल के स्वामी होने से 'महाकाल' कहलाए।

महाकालेश्वरउज्जैनमहाकाल
तीर्थ स्थान

उज्जैन में कालसर्प पूजा क्यों की जाती है?

उज्जैन महाकाल (काल के स्वामी) की नगरी है — कालसर्प दोष 'काल' का दण्ड है इसलिए काल के स्वामी (महाकाल) को प्रसन्न करने के लिए यहाँ पूजा की जाती है।

उज्जैनमहाकालकाल के स्वामी
तीर्थ स्थान

कालसर्प दोष शांति के लिए कौन से तीर्थ जाएं?

कालसर्प दोष शांति के लिए तीन प्रमुख तीर्थ हैं: त्र्यंबकेश्वर (नासिक), उज्जैन (महाकाल नगरी) और काशी (वाराणसी)।

तीर्थत्र्यंबकेश्वरउज्जैन
शिव-नाग संयुक्त सिद्धांत

भगवान शिव को महाकाल क्यों कहते हैं?

भगवान शिव को महाकाल इसलिए कहते हैं क्योंकि वे 'काल' (समय एवं मृत्यु) के स्वामी हैं — काल पर उनका पूर्ण अधिकार है।

महाकालशिवकाल स्वामी
तीर्थ एवं धार्मिक स्थल

उज्जैन महाकालेश्वर के दर्शन का समय

महाकालेश्वर में भस्म आरती सुबह 4-6 बजे, दद्योदक आरती 7-7:45 बजे, भोग आरती 10-10:45 बजे, संध्या आरती 7-7:45 बजे और शयन आरती रात 10:30-11 बजे होती है। भस्म आरती के लिए ऑनलाइन बुकिंग आवश्यक है।

महाकालेश्वरउज्जैनभस्म आरती
तीर्थ यात्रा

उज्जैन महाकालेश्वर दर्शन कैसे करें

दक्षिणमुखी (एकमात्र) ज्योतिर्लिंग। भस्म आरती 4AM = अवश्य (ऑनलाइन बुक)। 4AM-11PM। महाकाल लोक नया। काल भैरव (मदिरा अर्पित)। सिंहस्थ कुंभ। इंदौर ~55km।

उज्जैनमहाकालेश्वरदर्शन

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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