विस्तृत उत्तर
उज्जैन 'महाकाल' की नगरी है, जो स्वयं 'काल' के अधिपति हैं। यहाँ कालसर्प की पूजा सीधे 'काल' के स्वामी को प्रसन्न करने के लिए की जाती है।
कालसर्प दोष, वस्तुतः, 'काल' (शिव) द्वारा 'सर्प' (नाग) के माध्यम से दिया गया एक कार्मिक दण्ड है। अतः, काल के स्वामी (महाकाल) की शरण में जाकर इस दण्ड से मुक्ति पाना सर्वाधिक उपयुक्त है।





