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पुत्र मोह प्रश्नोत्तरी — 4 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित पुत्र मोह विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 4 प्रश्न

श्रीमद्भागवत

पुत्र मोह क्यों छोड़ना चाहिए?

गोकर्ण कहते हैं कि पुत्र-मोह अज्ञान है, मोह से नरक की प्राप्ति होती है और शरीर भी नश्वर है।

पुत्र मोहगोकर्णआत्मदेव
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव ने संन्यास क्यों नहीं माना?

आत्मदेव ने संन्यास को नीरस कहा और पुत्र-पौत्र से भरे गृहस्थ जीवन को सरस मानकर पुत्र मांगने का हठ किया।

आत्मदेवसंन्यासगृहस्थ
श्रीमद्भागवत

संन्यासी ने पुत्र मोह छोड़ने को क्यों कहा?

संन्यासी ने कहा कि कर्म की गति प्रबल है और पुत्र से सुख निश्चित नहीं; संतान के कारण सगर और अंग को भी दुख मिला।

पुत्र मोहसंन्यासीआत्मदेव
रामचरितमानस — बालकाण्ड

राजा दशरथ ने श्रीरामजी को देने में क्या आपत्ति जताई?

दशरथ का हृदय काँपा — 'सब सुत प्रिय मोहि प्रान कि नाई। राम देत नहिं बनइ गोसाई' — सब पुत्र प्राण समान हैं, राम को देना सम्भव नहीं। कहाँ भयानक राक्षस और कहाँ मेरा सुकुमार किशोर पुत्र!

बालकाण्डदशरथपुत्र मोह

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।