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प्यास प्रश्नोत्तरी — 6 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्यास विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 6 प्रश्न

लोक

जनलोक में भूख और प्यास होती है क्या?

नहीं, जनलोक में भूख और प्यास जैसे भौतिक क्लेशों का भय नहीं होता।

जनलोकभूखप्यास
जीवन एवं मृत्यु

प्रेत को जल न मिलने पर क्या होता है?

प्रेत को जल न मिलने पर — यममार्ग पर तृष्णा की असहनीय पीड़ा, मूर्च्छा, वैतरणी में रक्त-मवाद पीने को बाध्य। 'वहाँ कहीं जल नहीं दिखता' — गरुड़ पुराण का यही वर्णन है। तर्पण से यह पीड़ा कम होती है।

प्रेतजलप्यास
जीवन एवं मृत्यु

जलदान का क्या महत्व है?

गरुड़ पुराण में जलदान सर्वसुलभ और अनिवार्य दान है। यममार्ग पर जल का अभाव है — जलदान करने वाले को राहत मिलती है। तर्पण का जल प्रेत की प्यास बुझाता है। गंगाजल देना सर्वश्रेष्ठ जलदान है।

जलदानमहत्वप्यास
जीवन एवं मृत्यु

प्रेत को प्यास क्यों लगती है?

प्रेत को प्यास इसलिए लगती है क्योंकि वासनामय शरीर में जल की कामना होती है और यममार्ग पर जल का घोर अभाव है। जिसने जलदान नहीं किया, उसे यह कष्ट अधिक होता है। तर्पण से राहत मिलती है।

प्रेतप्यासतर्पण
जीवन एवं मृत्यु

नरक में जीव को जल मिलता है या नहीं?

नरक में पापी जीव को स्वच्छ जल नहीं मिलता — प्यास की यातना होती है। कुछ नरकों में रक्त-मिश्रित या विष-युक्त जल मिलता है। जिसने जीवन में जलदान नहीं किया, उसे यह कष्ट विशेष रूप से भोगना पड़ता है।

नरकजलप्यास
जीवन एवं मृत्यु

यममार्ग में भूख-प्यास का क्या प्रभाव होता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार यममार्ग पर भूख-प्यास की तीव्र पीड़ा होती है जो सूक्ष्म शरीर में होती है। पिंडदान से यह कुछ कम होती है। जिसने जीवन में अन्न-जल दान किया हो, उसे कम कष्ट होता है। यह दान के महत्व को रेखांकित करता है।

यममार्गभूखप्यास

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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