विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में नरक में जल के विषय में स्पष्ट वर्णन मिलता है। पापी जीव को नरक में स्वच्छ जल नहीं मिलता — यह एक विशेष दंड है।
गरुड़ पुराण के अनुसार — यममार्ग पर और नरक में जीव अत्यंत प्यास से व्याकुल रहता है। यमदूत उसे जल पीने नहीं देते। जब पापी जीव अन्य आत्माओं से जल माँगता है, तो यमदूत उसे रोककर कहते हैं — 'तुमने जीवन में जलदान नहीं किया, इसलिए तुम्हें जल नहीं मिलेगा।'
कुछ नरकों में जल का जो रूप मिलता है वह और भी भयावह है — लोहितोद नरक में 'रक्त से भरा जल', सविष नरक में 'विष से युक्त जल' का वर्णन है। यह 'जल' पीने पर भी तृप्ति नहीं होती, बल्कि यातना और बढ़ती है।
गरुड़ पुराण का यह वर्णन जीवन में जलदान के महत्व को रेखांकित करता है। जिसने जीवन में प्यासों को जल दिया, गौ और अन्य जीवों को जल पिलाया — उसे नरक और यममार्ग में इस यातना से मुक्ति मिलती है।
इसीलिए शास्त्रों में जलदान, तालाब बनवाना और प्यासों को जल पिलाना महापुण्य माना गया है।





