ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
जीवन एवं मृत्यु⏱ 2 मिनट पठन

प्रेत को प्यास क्यों लगती है?

प्रेत को प्यास इसलिए लगती है क्योंकि वासनामय शरीर में जल की कामना होती है और यममार्ग पर जल का घोर अभाव है।

संक्षिप्त उत्तर

प्रेत को प्यास इसलिए लगती है क्योंकि वासनामय शरीर में जल की कामना होती है और यममार्ग पर जल का घोर अभाव है। जिसने जलदान नहीं किया, उसे यह कष्ट अधिक होता है। तर्पण से राहत मिलती है।

📖

विस्तृत उत्तर

गरुड़ पुराण में प्रेत को प्यास लगने का कारण भूख के समान ही वासनाओं और संस्कारों से जुड़ा है।

वासनामय शरीर की प्यास — प्रेत का सूक्ष्म शरीर वासनामय है। इस शरीर में जीवन की सभी इच्छाएँ और वासनाएँ संचित होती हैं — जिनमें जल की कामना भी शामिल है। 'जब आत्मा शरीर को त्यागती है तो उसमें भूख और प्यास का भाव आने लगता है।'

यममार्ग पर जल का अभाव — गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'वहाँ कहीं जल भी नहीं दिखता।' इस अभाव में प्यास की पीड़ा और भी तीव्र होती है।

कर्म-संबंधित प्यास — जिस व्यक्ति ने जीवन में दूसरों को जल से वंचित किया, जलदान नहीं किया — उसे प्रेत-अवस्था में यह प्यास विशेष रूप से कष्टकारी होती है।

तर्पण से राहत — इसीलिए मृत्यु के बाद तर्पण का विधान है। जल और तिल से किया गया तर्पण प्रेत की इस प्यास को कुछ कम करता है।

जलदान का फल — जिसने जीवन में जलदान किया हो — प्याऊ लगाई हो, प्यासों को पानी दिया हो — उसे प्रेत-अवस्था में भी जल की कुछ सुविधा मिलती है।

🔗

आगे क्या पढ़ें

प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी लिंक

इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
WhatsApp
क्या यह उत्तर सहायक था?

🏷 सम्बंधित विषय

प्रेतप्यासतर्पणगरुड़ पुराण
📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

प्रेत को प्यास क्यों लगती है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको जीवन एवं मृत्यु से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।

🙏 पूजा विधि📿 मंत्र जाप🔱 शिव पूजा🏠 वास्तु💭 सपनों का मतलब🪐 ज्योतिष

इसी विषय पर और प्रश्नोत्तर

टैग द्वारा खोजें:#प्रेत#प्यास#तर्पण#गरुड़ पुराण