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योगाग्नि प्रश्नोत्तरी — 4 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित योगाग्नि विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 4 प्रश्न

सती से पार्वती तक की महाकथा

दक्ष-यज्ञ में क्या हुआ और सती ने आत्मदाह क्यों किया?

दक्ष ने शिव को यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया और घोर अपमान किया। शिव के मना करने पर भी सती गईं। पति के अपमान से क्षुब्ध होकर और दक्ष के तमोगुणी शरीर से मुक्त होने के लिए सती ने योगाग्नि में आत्मदाह किया।

दक्ष यज्ञशिव अपमानसती आत्मदाह
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'योगाग्नि' से शरीर त्यागने का क्या अर्थ है?

'योगाग्नि' = योगशक्ति से प्रकट आन्तरिक दिव्य अग्नि। यह बाहरी आग नहीं, बल्कि प्राणशक्ति और योगसाधना से शरीर के भीतर अग्नि तत्व जाग्रत करना है। यह इच्छामृत्यु का उच्चतम रूप है जो केवल सिद्ध योगी कर सकते हैं।

बालकाण्डयोगाग्निअर्थ
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सतीजी ने किस प्रकार अपना शरीर त्यागा?

सतीजी ने योगाग्नि (योगशक्ति से प्रकट आन्तरिक अग्नि) से शरीर त्यागा — बाहरी अग्नि में नहीं कूदीं। शिवजी को हृदय में धारण करके अपनी योगशक्ति से शरीर भस्म कर डाला।

बालकाण्डयोगाग्निसती देहत्याग
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सतीजी ने दक्ष यज्ञ में अपमान सहकर क्या किया?

सतीजी ने शिवजी को हृदय में धारण करके योगाग्नि से अपना शरीर भस्म कर डाला। 'अस कहि जोग अगिनि तनु जारा। भयउ सकल मख हाहाकारा॥' — सारी यज्ञशाला में हाहाकार मच गया।

बालकाण्डसती देहत्यागयोगाग्नि

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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