विस्तृत उत्तर
सतीजी ने योगाग्नि से अपना शरीर त्यागा। उन्होंने बाहरी अग्नि में नहीं कूदा, बल्कि अपनी योगशक्ति से शरीर के भीतर ही अग्नि प्रकट करके शरीर भस्म कर दिया।
चौपाई — 'अस कहि जोग अगिनि तनु जारा।'
इसका अर्थ — ऐसा कहकर सतीजीने योगाग्निमें अपना शरीर जला डाला (भस्म कर डाला)।
योगाग्नि' का अर्थ है — योग की शक्ति से उत्पन्न अग्नि। यह बाहरी आग नहीं है, बल्कि आन्तरिक तपस्या और योग-साधना से प्रकट होने वाली दिव्य अग्नि है। सतीजी परम योगिनी थीं, इसलिये उन्होंने अपनी योगशक्ति से ही शरीर का त्याग किया।
सतीजी ने देहत्याग से पहले शिवजी (चन्द्रमौलि वृषकेतु) को हृदय में धारण किया और फिर योगाग्नि प्रकट की।





