विस्तृत उत्तर
योगाग्नि' का अर्थ है — योग की शक्ति से उत्पन्न होने वाली आन्तरिक दिव्य अग्नि।
यह बाहरी अग्नि (आग, हवन कुण्ड) नहीं है। जब कोई महान योगी या योगिनी अपनी प्राणशक्ति और योगसाधना के बल पर शरीर के भीतर ही अग्नि तत्व को जाग्रत कर लेता है, तो उसे योगाग्नि कहते हैं। इससे शरीर स्वयं ही भस्म हो जाता है।
रामचरितमानस में — 'अस कहि जोग अगिनि तनु जारा' — सतीजी ने शिवजी को हृदय में धारण करके अपनी योगशक्ति से शरीर में अग्नि प्रकट की और शरीर भस्म कर डाला। यह इच्छामृत्यु का एक उच्चतम रूप है।
हिन्दू शास्त्रों में योगाग्नि से देहत्याग को सामान्य आत्महत्या नहीं माना जाता — यह एक दिव्य और पवित्र प्रक्रिया है जो केवल सिद्ध योगी ही कर सकते हैं।




