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वास्तु पुरुष — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 4 प्रश्न

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वास्तु शास्त्र

वास्तु पुरुष कौन है और वास्तु मंडल क्या है

वास्तु पुरुष भूमि का अधिष्ठाता देवता है जो औंधे मुख (सिर ईशान, पैर नैऋत्य) लेटा है। वास्तु मंडल 81 पद (9×9) का ग्रिड है जिसमें 45 देवता विभिन्न स्थानों पर विराजमान हैं — केंद्र में ब्रह्मा। इसी के आधार पर भवन निर्माण किया जाता है।

वास्तु पुरुषवास्तु मंडलमयमतम्
वास्तु शास्त्र

भूमि पूजन में कौन से देवताओं की पूजा करें

भूमि पूजन में गणेश, भूमि देवी (पृथ्वी माता), वास्तु पुरुष, अष्ट दिक्पाल (इंद्र, अग्नि, यम, निऋति, वरुण, वायु, कुबेर, ईशान), नवग्रह, नाग देवता और विश्वकर्मा की पूजा करें। ईशान कोण से आरंभ करें।

भूमि पूजनवास्तु पुरुषनिर्माण
मंदिर वास्तु

मंदिर के वास्तु में ब्रह्मस्थान का क्या अर्थ है?

ब्रह्मस्थान = वास्तु का ऊर्जात्मक केन्द्र बिन्दु। वास्तु पुरुष का नाभि स्थान। मंदिर: गर्भगृह = ब्रह्मस्थान — ऊर्जा यहाँ से सम्पूर्ण मंदिर में। मूर्ति ठीक यहाँ। शिखर = ऊपर से ऊर्जा ग्रहण → गर्भगृह में। नियम: शुद्ध/खाली रखें — शौचालय/कूड़ा=पूर्णतः वर्जित। घर: केन्द्र खुला+तुलसी/दीपक।

ब्रह्मस्थानवास्तु पुरुषकेन्द्र बिन्दु
मंदिर वास्तु

मंदिर की वास्तु में वास्तु पुरुष मंडल का क्या अर्थ है?

दिव्य पुरुष भूमि पर लेटा = 81/64 खाने = मंडल। केंद्र (पेट) = ब्रह्मस्थान = गर्भगृह। ईशान (शिर) = शुभ (जल/पूजा)। नैऋत्य (पैर) = स्थिर। हर मंदिर/घर = मंडल अनुसार।

वास्तु पुरुषमंडलअर्थ

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।