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श्रीमद्भगवद्गीता · भक्ति योग

श्लोक 15

भक्ति योग · Bhakti Yoga

मूल पाठ

यस्मान्नोद्विजते लोको लोकान्नोद्विजते च यः | हर्षामर्षभयोद्वेगैर्मुक्तो यः स च मे प्रियः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जिससे किसी प्राणीको उद्वेग नहीं होता और जिसको खुद भी किसी प्राणीसे उद्वेग नहीं होता तथा जो हर्ष, अमर्ष (ईर्ष्या), भय और उद्वेगसे रहित है, वह मुझे प्रिय है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जिससे किसी प्राणीको उद्वेग नहीं होता और जिसको खुद भी किसी प्राणीसे उद्वेग नहीं होता तथा जो हर्ष, अमर्ष (ईर्ष्या), भय और उद्वेगसे रहित है, वह मुझे प्रिय है।

English Meaning

He by whom the world is not agitated and who cannot be agitated by the world, and who is freed from joy, anger, fear and anxiety he is dear to Me.

He by whom the world is not agitated and who cannot be agitated by the world, and who is freed from joy, anger, fear and anxiety he is dear to Me.

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