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श्रीमद्भगवद्गीता · दैवासुर सम्पद् विभाग योग

श्लोक 4

दैवासुर सम्पद् विभाग योग · Daivasura Sampad Vibhaga Yoga

मूल पाठ

दम्भो दर्पोऽभिमानश्च क्रोधः पारुष्यमेव च | अज्ञानं चाभिजातस्य पार्थ सम्पदमासुरीम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे पृथानन्दन ! दम्भ करना, घमण्ड करना, अभिमान करना, क्रोध करना, कठोरता रखना और अविवेकका होना भी -- ये सभी आसुरीसम्पदाको प्राप्त हुए मनुष्यके लक्षण हैं।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे पृथानन्दन ! दम्भ करना, घमण्ड करना, अभिमान करना, क्रोध करना, कठोरता रखना और अविवेकका होना भी -- ये सभी आसुरीसम्पदाको प्राप्त हुए मनुष्यके लक्षण हैं।

English Meaning

Hypocrisy, arrogance and self-conceit, anger and also harshness and ignorance, belong to one who is born for a demoniacal state, O Partha (Arjuna).

Hypocrisy, arrogance and self-conceit, anger and also harshness and ignorance, belong to one who is born for a demoniacal state, O Partha (Arjuna).

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