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श्रीमद्भगवद्गीता · दैवासुर सम्पद् विभाग योग

श्लोक 5

दैवासुर सम्पद् विभाग योग · Daivasura Sampad Vibhaga Yoga

मूल पाठ

दैवी सम्पद्विमोक्षाय निबन्धायासुरी मता | मा शुचः सम्पदं दैवीमभिजातोऽसि पाण्डव

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

दैवी-सम्पत्ति मुक्तिके लिये और आसुरी-सम्पत्ति बन्धनके लिये है। हे पाण्डव तुम दैवी-सम्पत्तिको प्राप्त हुए हो, इसलिये तुम्हें शोक (चिन्ता) नहीं करना चाहिये।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

दैवी-सम्पत्ति मुक्तिके लिये और आसुरी-सम्पत्ति बन्धनके लिये है। हे पाण्डव तुम दैवी-सम्पत्तिको प्राप्त हुए हो, इसलिये तुम्हें शोक (चिन्ता) नहीं करना चाहिये।

English Meaning

The divine nature is deemed conducive to liberation, and the demoniacal to bondage. Grieve not, O Arjuna, thou art born with divine endowments.

The divine nature is deemed conducive to liberation, and the demoniacal to bondage. Grieve not, O Arjuna, thou art born with divine endowments.

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