ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · दैवासुर सम्पद् विभाग योग

श्लोक 7

दैवासुर सम्पद् विभाग योग · Daivasura Sampad Vibhaga Yoga

मूल पाठ

प्रवृत्तिं च निवृत्तिं च जना न विदुरासुराः | न शौचं नापि चाचारो न सत्यं तेषु विद्यते

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

आसुरी प्रकृतिवाले मनुष्य प्रवृत्ति और निवृत्तिको नहीं जानते और उनमें न बाह्यशुद्धि, न श्रेष्ठ आचरण तथा न सत्य-पालन ही होता है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

आसुरी प्रकृतिवाले मनुष्य प्रवृत्ति और निवृत्तिको नहीं जानते और उनमें न बाह्यशुद्धि, न श्रेष्ठ आचरण तथा न सत्य-पालन ही होता है।

English Meaning

The demoniacal know not what to do and what to refrain from; neither purity, nor right conduct nor truth is found in them.

The demoniacal know not what to do and what to refrain from; neither purity, nor right conduct nor truth is found in them.

आगे पढ़ें — दैवासुर सम्पद् विभाग योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता