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श्रीमद्भगवद्गीता · दैवासुर सम्पद् विभाग योग

श्लोक 8

दैवासुर सम्पद् विभाग योग · Daivasura Sampad Vibhaga Yoga

मूल पाठ

असत्यमप्रतिष्ठं ते जगदाहुरनीश्वरम् | अपरस्परसम्भूतं किमन्यत्कामहैतुकम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

वे कहा करते हैं कि संसार असत्य, अप्रतिष्ठित और बिना ईश्वरके अपने-आप केवल स्त्री-पुरुषके संयोगसे पैदा हुआ है। इसलिये काम ही इसका कारण है, और कोई कारण नहीं है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

वे कहा करते हैं कि संसार असत्य, अप्रतिष्ठित और बिना ईश्वरके अपने-आप केवल स्त्री-पुरुषके संयोगसे पैदा हुआ है। इसलिये काम ही इसका कारण है, और कोई कारण नहीं है।

English Meaning

They say, "This universe is without truth, without (moral) basis, without a God, brought about by mutual union, with lust for its cause; what else?"

They say, "This universe is without truth, without (moral) basis, without a God, brought about by mutual union, with lust for its cause; what else?"

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