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श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 46

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम् | स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जिस परमात्मासे सम्पूर्ण प्राणियोंकी उत्पत्ति होती है और जिससे यह सम्पूर्ण संसार व्याप्त है, उस परमात्माका अपने कर्मके द्वारा पूजन करके मनुष्य सिद्धिको प्राप्त हो जाता है।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जिस परमात्मासे सम्पूर्ण प्राणियोंकी उत्पत्ति होती है और जिससे यह सम्पूर्ण संसार व्याप्त है, उस परमात्माका अपने कर्मके द्वारा पूजन करके मनुष्य सिद्धिको प्राप्त हो जाता है।

English Meaning

He from Whom all the beings have evolved and by Whom all this is pervaded worshipping Him with his own duty, man attains perfection.

He from Whom all the beings have evolved and by Whom all this is pervaded worshipping Him with his own duty, man attains perfection.

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