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श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 47

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात् | स्वभावनियतं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अच्छी तरहसे अनुष्ठान किये हुए परधर्मसे गुणरहित अपना धर्म श्रेष्ठ है। कारण कि स्वभावसे नियत किये हुए स्वधर्मरूप कर्मको करता हुआ मनुष्य पापको प्राप्त नहीं होता।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

अच्छी तरहसे अनुष्ठान किये हुए परधर्मसे गुणरहित अपना धर्म श्रेष्ठ है। कारण कि स्वभावसे नियत किये हुए स्वधर्मरूप कर्मको करता हुआ मनुष्य पापको प्राप्त नहीं होता।

English Meaning

Better is one's own duty (though) destitute of merits, than the duty of another well performed. He who does the duty ordained by his own nature incurs no sin.

Better is one's own duty (though) destitute of merits, than the duty of another well performed. He who does the duty ordained by his own nature incurs no sin.

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