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श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 50

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

सिद्धिं प्राप्तो यथा ब्रह्म तथाप्नोति निबोध मे | समासेनैव कौन्तेय निष्ठा ज्ञानस्य या परा

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे कौन्तेय ! सिद्धि-(अन्तःकरणकी शुद्धि-) को प्राप्त हुआ साधक ब्रह्मको, जो कि ज्ञानकी परा निष्ठा है, जिस प्रकारसे प्राप्त होता है, उस प्रकारको तुम मुझसे संक्षेपमें ही समझो।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे कौन्तेय ! सिद्धि-(अन्तःकरणकी शुद्धि-) को प्राप्त हुआ साधक ब्रह्मको, जो कि ज्ञानकी परा निष्ठा है, जिस प्रकारसे प्राप्त होता है, उस प्रकारको तुम मुझसे संक्षेपमें ही समझो।

English Meaning

Learn from Me in brief, O Arjuna, how he who has attained perfection reaches Brahman (the Eternal), that supreme state of knowledge.

Learn from Me in brief, O Arjuna, how he who has attained perfection reaches Brahman (the Eternal), that supreme state of knowledge.

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