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श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 58

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

मच्चित्तः सर्वदुर्गाणि मत्प्रसादात्तरिष्यसि | अथ चेत्त्वमहङ्कारान्न श्रोष्यसि विनङ्क्ष्यसि

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मेरेमें चित्तवाला होकर तू मेरी कृपासे सम्पूर्ण विघ्नोंको तर जायगा और यदि तू अहंकारके कारण मेरी बात नहीं सुनेगा तो तेरा पतन हो जायगा।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

मेरेमें चित्तवाला होकर तू मेरी कृपासे सम्पूर्ण विघ्नोंको तर जायगा और यदि तू अहंकारके कारण मेरी बात नहीं सुनेगा तो तेरा पतन हो जायगा।

English Meaning

Fixing thy mind on Me, thou shalt by My grace overcome all obstacles; but if from egoism thou wilt not hear Me, thou shalt perish.

Fixing thy mind on Me, thou shalt by My grace overcome all obstacles; but if from egoism thou wilt not hear Me, thou shalt perish.

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