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श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 59

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

यदहङ्कारमाश्रित्य न योत्स्य इति मन्यसे | मिथ्यैष व्यवसायस्ते प्रकृतिस्त्वां नियोक्ष्यति

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अहंकारका आश्रय लेकर तू जो ऐसा मान रहा है कि मैं युद्ध नहीं करूँगा, तेरा यह निश्चय मिथ्या (झूठा) है; क्योंकि तेरी क्षात्र-प्रकृति तेरेको युद्धमें लगा देगी।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

अहंकारका आश्रय लेकर तू जो ऐसा मान रहा है कि मैं युद्ध नहीं करूँगा, तेरा यह निश्चय मिथ्या (झूठा) है; क्योंकि तेरी क्षात्र-प्रकृति तेरेको युद्धमें लगा देगी।

English Meaning

If, filled with egoism, thou thinkest: "I will not fight", vain is this, thy resolve; Nature will compel thee.

If, filled with egoism, thou thinkest: "I will not fight", vain is this, thy resolve; Nature will compel thee.

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