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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड छंद 183

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

सुर मुनि गंधर्ब मिलि करि सर्व गें बिरंचि के लोका । संग गोतनुधारी भूमि बिचारी परम बिकल भय सोका ॥ ब्रह्माँ सब जाना मन अनुमाना मोर कछू न बसाई । जा करि तैं दासी सो अबिनासी हमरेउ तोर सहाई ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

तब देवता, मुनि और गन्धर्व सब मिलकर ब्रह्माजीके लोक (सत्यलोक) को गये। भय और शोकसे अत्यन्त व्याकुल बेचारी पृथ्वी भी गौका शरीर धारण किये हुए उनके साथ थी। ब्रह्माजी सब जान गये। उन्होंने मनमें अनुमान किया कि इसमें मेरा कुछ भी वश नहीं चलनेका। [तब उन्होंने पृथ्वीसे कहा कि-] जिसकी तू दासी है, वही अविनाशी हमारा और तुम्हारा दोनोंका सहायक है।

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श्रीरामचरितमानस छंद 183 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik