वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम्। सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं रामवल्लभाम्॥ ५ ॥
Udbhavasthitisamharakarinim kleshaharinim. Sarvashreyaskarim sitam natoham ramavallabham.
उत्पत्ति, स्थिति (पालन) और संहार करनेवाली, क्लेशोंकी हरनेवाली तथा सम्पूर्ण कल्याणोंकी करनेवाली श्रीरामचन्द्रजीकी प्रियतमा श्रीसीताजीको मैं नमस्कार करता हूँ॥ ५ ॥
इस श्लोक में माता सीता की वंदना की गई है जो उत्पत्ति, पालन और संहार करने वाली हैं। वे श्रीराम की प्रियतमा हैं और सभी क्लेशों को दूर कर संपूर्ण कल्याण करने वाली हैं।
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