वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
नानापुराणनिगमागमसम्मतं यद् रामायणे निगदितं क्वचिदन्यतोऽपि। स्वान्तःसुखाय तुलसी रघुनाथगाथा- भाषानिबन्धमतिमञ्जुलमातनोति ॥ ७ ॥
Nanapurananigamagamasammatam yad Ramayane nigaditam kwachidanyatopi. Swantahsukhaya tulasi raghunathagatha- Bhashanibandhamatimanjulamatanoti.
अनेक पुराण, वेद और [तन्त्र] शास्त्रसे सम्मत तथा जो रामायणमें वर्णित है और कुछ अन्यत्रसे भी उपलब्ध श्रीरघुनाथजीकी कथाको तुलसीदास अपने अन्तःकरणके सुखके लिये अत्यन्त मनोहर भाषारचनामें विस्तृत करता है॥ ७ ॥
तुलसीदास जी बताते हैं कि वे यह रामकथा अपने अन्तःकरण के सुख (स्वान्तःसुखाय) के लिए रच रहे हैं। यह कथा पुराणों, वेदों, तंत्र शास्त्रों से सम्मत है और रामायण तथा अन्य ग्रंथों पर आधारित है।
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