वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
सो०—जो सुमिरत सिधि होइ गन नायक करिबर बदन। करउ अनुग्रह सोइ बुद्धि रासि सुभ गुन सदन॥ १ ॥
Jo sumirat sidhi hoi gan nayak karibar badan. Karau anugrah soi buddhi rasi subh gun sadan.
जिन्हें स्मरण करनेसे सब कार्य सिद्ध होते हैं, जो गणोंके स्वामी और सुन्दर हाथीके मुखवाले हैं, वे ही बुद्धिके राशि और शुभ गुणोंके धाम (श्रीगणेशजी) मुझपर कृपा करें॥ १ ॥
मंगलाचरण के श्लोकों के बाद यह प्रथम सोरठा है, जिसमें श्री गणेश जी की वंदना की गई है। जिनके स्मरण मात्र से कार्य सिद्ध होते हैं, वे बुद्धि के सागर और शुभ गुणों के धाम गणेश जी मुझ पर कृपा करें।
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