वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
मूक होइ बाचाल पंगु चढ़इ गिरिबर गहन। जासु कृपाँ सो दयाल द्रवउ सकल कलि मल दहन॥ २ ॥
Mook hoi bachal pangu chadhai giribar gahan. Jaasu kripa so dayal dravau sakal kali mal dahan.
जिनकी कृपासे गूँगा बहुत सुन्दर बोलनेवाला हो जाता है और लँगड़ा-लूला दुर्गम पहाड़पर चढ़ जाता है, वे कलियुगके सब पापोंको जला डालनेवाले दयालु (भगवान्) मुझपर द्रवित हों (दया करें),॥ २ ॥
यहाँ ईश्वर की कृपा की अपार महिमा बताई गई है। जिनकी कृपा से गूँगा बोलने लगता है और लँगड़ा ऊँचे पहाड़ों को पार कर लेता है, वे कलियुग के पापों को नष्ट करने वाले दयालु भगवान मुझ पर द्रवित हों।
आगे पढ़ें — बाल काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस