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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

सोरठा 2

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

मूक होइ बाचाल पंगु चढ़इ गिरिबर गहन। जासु कृपाँ सो दयाल द्रवउ सकल कलि मल दहन॥ २ ॥

Mook hoi bachal pangu chadhai giribar gahan. Jaasu kripa so dayal dravau sakal kali mal dahan.

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जिनकी कृपासे गूँगा बहुत सुन्दर बोलनेवाला हो जाता है और लँगड़ा-लूला दुर्गम पहाड़पर चढ़ जाता है, वे कलियुगके सब पापोंको जला डालनेवाले दयालु (भगवान्) मुझपर द्रवित हों (दया करें),॥ २ ॥

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

यहाँ ईश्वर की कृपा की अपार महिमा बताई गई है। जिनकी कृपा से गूँगा बोलने लगता है और लँगड़ा ऊँचे पहाड़ों को पार कर लेता है, वे कलियुग के पापों को नष्ट करने वाले दयालु भगवान मुझ पर द्रवित हों।

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श्रीरामचरितमानस सोरठा 2 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik