वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
नील सरोरुह स्याम तरुन अरुन बारिज नयन। करउ सो मम उर धाम सदा छीरसागर सयन॥ ३ ॥
Neel saroruha syam tarun arun barij nayan. Karau so mama ur dham sada chheerasagar sayan.
जो नील कमलके समान श्यामवर्ण हैं, पूर्ण खिले हुए लाल कमलके समान जिनके नेत्र हैं और जो सदा क्षीरसागरमें शयन करते हैं, वे भगवान् (नारायण) मेरे हृदयमें निवास करें॥ ३ ॥
इस सोरठे में भगवान विष्णु (नारायण) की वंदना की गई है, जो क्षीरसागर में शयन करते हैं। उनका वर्ण नीलकमल के समान श्याम है और नेत्र खिले हुए लाल कमल की तरह हैं। तुलसीदास जी उनसे अपने हृदय में निवास करने की प्रार्थना कर रहे हैं।
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