वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
कुंद इंदु सम देह उमा रमन करुना अयन। जाहि दीन पर नेह करउ कृपा मर्दन मयन॥ ४ ॥
Kund indu sam deh uma raman karuna ayan. Jahi deen par neh karau kripa mardan mayan.
जिनका कुन्दके पुष्प और चन्द्रमाके समान (गौर) शरीर है, जो पार्वतीजीके प्रियतम और दयाके धाम हैं और जिनका दीनोंपर स्नेह है, वे कामदेवका मर्दन करनेवाले (शङ्करजी) मुझपर कृपा करें॥ ४ ॥
यहाँ कामदेव का मर्दन करने वाले, माता पार्वती के प्रियतम भगवान शंकर की वंदना की गई है। उनका शरीर कुंद पुष्प और चंद्रमा के समान श्वेत (गौर) है, और वे दीनों पर स्नेह करने वाले दया के धाम हैं।
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