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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

सोरठा 5

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

बंदउँ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि। महामोह तम पुंज जासु बचन रबि कर निकर॥ ५ ॥

Bandau guru pad kanj kripa sindhu nararoop hari. Mahamoha tam punj jaasu bachan rabi kar nikar.

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मैं उन गुरु महाराजके चरणकमलकी वन्दना करता हूँ, जो कृपाके समुद्र और नररूपमें श्रीहरि ही हैं और जिनके वचन महामोहरूपी घने अन्धकारके नाश करनेके लिये सूर्य-किरणोंके समूह हैं॥ ५ ॥

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

गुरु की महिमा का वर्णन है, जहाँ उन्हें साक्षात् नर रूप में श्रीहरि (भगवान) और कृपा का सागर बताया गया है। उनके वचन सूर्य की किरणों के समान हैं, जो महामोह (अज्ञान) रूपी घने अंधकार को पूरी तरह नष्ट कर देते हैं।

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श्रीरामचरितमानस सोरठा 5 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik