वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
बंदउँ गुरु पद पदुम परागा। सुरुचि सुबास सरस अनुरागा॥ अमिअ मूरिमय चूरन चारू। समन सकल भव रुज परिवारू॥
Bandau guru pad padum paraga. Suruchi subaas saras anuraga. Amia moorimay chooran chaaroo. Saman sakal bhav ruj parivaaroo.
मैं गुरु महाराजके चरणकमलोंकी रजकी वन्दना करता हूँ, जो सुरुचि(सुन्दर स्वाद), सुगन्ध तथा अनुरागरूपी रससे पूर्ण है। वह अमर मूल (सञ्जीवनी जड़ी)का सुन्दर चूर्ण है, जो सम्पूर्ण भवरोगोंके परिवारको नाश करनेवाला है॥ १ ॥
यहाँ गुरु के चरण कमलों की धूलि (रज) की वंदना है। इस रज को संजीवनी जड़ी (अमर मूल) का ऐसा सुंदर चूर्ण बताया गया है, जो जन्म-मरण रूपी सभी सांसारिक रोगों (भवरोगों) के पूरे परिवार का नाश करने में सक्षम है।
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