ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

चौपाई 1

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

बंदउँ गुरु पद पदुम परागा। सुरुचि सुबास सरस अनुरागा॥ अमिअ मूरिमय चूरन चारू। समन सकल भव रुज परिवारू॥

Bandau guru pad padum paraga. Suruchi subaas saras anuraga. Amia moorimay chooran chaaroo. Saman sakal bhav ruj parivaaroo.

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मैं गुरु महाराजके चरणकमलोंकी रजकी वन्दना करता हूँ, जो सुरुचि(सुन्दर स्वाद), सुगन्ध तथा अनुरागरूपी रससे पूर्ण है। वह अमर मूल (सञ्जीवनी जड़ी)का सुन्दर चूर्ण है, जो सम्पूर्ण भवरोगोंके परिवारको नाश करनेवाला है॥ १ ॥

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

यहाँ गुरु के चरण कमलों की धूलि (रज) की वंदना है। इस रज को संजीवनी जड़ी (अमर मूल) का ऐसा सुंदर चूर्ण बताया गया है, जो जन्म-मरण रूपी सभी सांसारिक रोगों (भवरोगों) के पूरे परिवार का नाश करने में सक्षम है।

आगे पढ़ें — बाल काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस

श्रीरामचरितमानस चौपाई 1 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik