वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
सुकृति संभु तन बिमल बिभूती। मंजुल मंगल मोद प्रसूती॥ जन मन मंजु मुकुर मल हरनी। किएँ तिलक गुन गन बस करनी॥
Sukriti sambhu tan bimal bibhooti. Manjul mangal mod prasooti. Jan man manju mukur mal harani. Kien tilak gun gan bas karani.
वह रज सुकृती (पुण्यवान् पुरुष) रूपी शिवजीके शरीरपर सुशोभित निर्मल विभूति है और सुन्दर कल्याण और आनन्दकी जननी है, भक्तके मनरूपी सुन्दर दर्पणके मैलको दूर करनेवाली और तिलक करनेसे गुणोंके समूहको वशमें करनेवाली है॥ २ ॥
गुरु पद रज की महिमा बताते हुए उसे शिव जी के शरीर की भस्म (विभूति) के समान पवित्र बताया गया है। यह रज भक्त के मन रूपी दर्पण के मैल को साफ़ करती है और मस्तक पर इसका तिलक करने से सद्गुण वश में हो जाते हैं।
आगे पढ़ें — बाल काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस