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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

चौपाई 2

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

सुकृति संभु तन बिमल बिभूती। मंजुल मंगल मोद प्रसूती॥ जन मन मंजु मुकुर मल हरनी। किएँ तिलक गुन गन बस करनी॥

Sukriti sambhu tan bimal bibhooti. Manjul mangal mod prasooti. Jan man manju mukur mal harani. Kien tilak gun gan bas karani.

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

वह रज सुकृती (पुण्यवान् पुरुष) रूपी शिवजीके शरीरपर सुशोभित निर्मल विभूति है और सुन्दर कल्याण और आनन्दकी जननी है, भक्तके मनरूपी सुन्दर दर्पणके मैलको दूर करनेवाली और तिलक करनेसे गुणोंके समूहको वशमें करनेवाली है॥ २ ॥

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

गुरु पद रज की महिमा बताते हुए उसे शिव जी के शरीर की भस्म (विभूति) के समान पवित्र बताया गया है। यह रज भक्त के मन रूपी दर्पण के मैल को साफ़ करती है और मस्तक पर इसका तिलक करने से सद्गुण वश में हो जाते हैं।

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श्रीरामचरितमानस चौपाई 2 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik