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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

श्लोक 2

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

भवानीशङ्करौ वन्दे श्रद्धाविश्वासरूपिणौ। याभ्यां विना न पश्यन्ति सिद्धाः स्वान्तःस्थमीश्वरम्॥ २ ॥

Bhavanishankarau vande shraddhavishwasarupinau. Yabhyam vina na pashyanti siddhah swantahsthamishwaram.

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्रद्धा और विश्वासके स्वरूप श्रीपार्वतीजी और श्रीशङ्करजीकी मैं वन्दना करता हूँ, जिनके बिना सिद्धजन अपने अन्तःकरणमें स्थित ईश्वरको नहीं देख सकते॥ २ ॥

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

इस श्लोक में माता भवानी (पार्वती) को 'श्रद्धा' और भगवान शंकर को 'विश्वास' का साक्षात् स्वरूप बताया गया है। यह आध्यात्मिक तथ्य प्रस्तुत किया गया है कि बिना श्रद्धा और विश्वास के सिद्ध योगी भी अपने हृदय में बसे ईश्वर का दर्शन नहीं कर सकते।

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