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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

श्लोक 1

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥

Varnanamarthasanghanam rasanam chhandasamapi. Mangalanam cha karttarau vande vanivinayakau.

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

तुलसीदास जी मंगलाचरण के इस प्रथम श्लोक में वाणी की देवी सरस्वती और विघ्नहर्ता विनायक (गणेश) की वंदना करते हैं। वे इन्हें सभी अक्षरों, अर्थों, रसों, छंदों और मंगलों का मूल कर्ता मानते हैं।

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