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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड छंद 236

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर साँवरो । करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो ॥ एहि भाँति गौरी असीस सुनि सिय सहित हियँ हरषीं अली । तुलसी भवानीहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जिसमें तुम्हारा मन अनुरक्त हो गया है, वही स्वभावसे ही सुंदर साँवला वर तुमको मिलेगा। वह दयाका खजाना और सर्वज्ञ है, तुम्हारे शील और स्नेहको जानता है। इस प्रकार श्रीगौरीजीका आशीर्वाद सुनकर जानकीजीसमेत सब सखियाँ हृदयमें हर्षित हुईं। तुलसीदासजी कहते हैं- भवानीजीको बार-बार पूजकर सीताजी प्रसन्न मनसे राजमहलको लौट चलीं।

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श्रीरामचरितमानस छंद 236 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik