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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड छंद 311

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

उपमा न कोउ कह दास तुलसी कतहुँ कबि कोबिद कहैं । बल बिनय बिद्या सील सोभा सिंधु इन्ह से एइ अहैं ॥ पुर नारि सकल पसारि अंचल बिधिहि बचन सुनावहीं । ब्याहिअहुँ चारिउ भाइ एहिं पुर हम सुमंगल गावहीं ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

दास तुलसी कहता है कवि और कोविद (विद्वान) कहते हैं, इनकी उपमा कहीं कोई नहीं है । बल, विनय, विद्या, शील और शोभा के समुद्र इनके समान ये ही हैं । जनकपुर की सब स्त्रियाँ आँचल फैलाकर विधाता को यह वचन (विनती) सुनाती हैं कि चारों भाइयों का विवाह इसी नगर में हो और हम सब सुंदर मंगल गावें ।

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श्रीरामचरितमानस छंद 311 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik