ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड छंद 317

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

अति हरषु राजसमाज दुहु दिसि दुंदुभीं बाजहिं घनी । बरषहिं सुमन सुर हरषि कहि जय जयति जय रघुकुलमनी ॥ एहि भाँति जानि बरात आवत बाजने बहु बाजहीं । रानी सुआसिनि बोलि परिछनि हेतु मंगल साजहीं ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

दोनों ओर से राजसमाज में अत्यन्त हर्ष है और बड़े जोर से नगाड़े बज रहे हैं । देवता प्रसन्न होकर और ‘रघुकुलमणि श्री राम की जय हो, जय हो, जय हो’ कहकर फूल बरसा रहे हैं । इस प्रकार बारात को आती हुई जानकर बहुत प्रकार के बाजे बजने लगे और रानी सुहागिन स्त्रियों को बुलाकर परछन के लिए मंगल द्रव्य सजाने लगीं ॥

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श्रीरामचरितमानस छंद 317 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik