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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड छंद 318

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

को जान केहि आनंद बस सब ब्रह्मु बर परिछन चली । कल गान मधुर निसान बरषहिं सुमन सुर सोभा भली ॥ आनंदकंदु बिलोकि दूलहु सकलहियँ हरषित भई । अंभोज अंबक अंबु उमगि सुअंग पुलकावलि छई ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

कौन किसे जाने-पहिचाने! आनंद के वश हुई सब दूलह बने हुए ब्रह्म का परछन करने चलीं । मनोहर गान हो रहा है । मधुर-मधुर नगाड़े बज रहे हैं, देवता फूल बरसा रहे हैं, बड़ी अच्छी शोभा है । आनंदकन्द दूलह को देखकर सब स्त्रियाँ हृदय में हर्षित हुईं । उनके कमल सरीखे नेत्रों में प्रेमाश्रुओं का जल उमड़ आया और सुंदर अंगों में पुलकावली छा गई ॥

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श्रीरामचरितमानस छंद 318 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik