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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड छंद 319

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

बैठारि आसन आरती करि निरखि बरु सुखु पावहीं । मनि बसन भूषन भूरि वारहिं नारि मंगल गावहीं ॥ ब्रह्मादि सुरबर बिप्र बेष बनाइ कौतुक देखहीं । अवलोकि रघुकुल कमल रबि छबि सुफल जीवन लेखहीं ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

आसनपर बैठाकर, आरती करके दूलहको देखकर स्त्रियाँ सुख पा रही हैं। वे ढेरके ढेर मणि, वस्त्र और गहने निछावर करके मंगल गा रही हैं। ब्रह्मा आदि श्रेष्ठ देवता ब्राह्मणका वेश बनाकर यह कौतुक देख रहे हैं। वे रघुकुलरूपी कमलको प्रफुल्लित करनेवाले सूर्य श्रीरामचन्द्रजीकी छबि देखकर अपना जीवन सफल जान रहे हैं।

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श्रीरामचरितमानस छंद 319 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik